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Monday, 28 April 2025

 शव्वाल उल मुकर्रम, 1446 हिजरी 

   फरमाने रसूल   ﷺ    

"सिर्फ तीन जगह पर झूठ जाएज़ और हलाल है, एक ये के आदमी अपनी बीवी से बात करें ताकि उसको राज़ी कर ले, दूसरा जंग में झूठ बोलना और तीसरा लोगों के दरमियान सुलह कराने के लिए झूठ बोलना।"

- अबू दाऊद 

शाम के शहर हमाह से था मदीना मुनव्वरा में इन्सानियत की बेलौस ख़िदमत करने वाले शेख़ इस्माईल का ताल्लुक़ 

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बख्तावर अदब : मुस्लमानों के लिए दुनियाभर में दूसरे इंतिहाई मुक़द्दस शहर मदीना मुनव्वरा में 40 बरस से ज़ाइरीन को मुफ़्त चाय और क़हवा पिलाने वाले 96 साला शेख़ इस्माईल अलज़ाइम अब्बू इंतिक़ाल कर गए। शाम के शहर हमास से ताअल्लुक रखने वाले शेख इस्माईल गुजिश्ता पचास सालों से मदीना मुनव्वरा में मुकीम थे और हर आने वाले जाइरीन को मुफत चाय, काफी और खुजूर पेश किया करते थे। कभी-कभी ज़ाइरीन को वे अपने आबाई इलाक़े से आने वाली रिवायती मिठाईयां भी पेश करते थे।
    जानकारी के मुताबिक 96 साला बुज़ुर्ग शेख़ इस्माईल अलज़ाइम मस्जिद नबवी ﷺ के क़रीब एक प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठ जाते। उनके सामने एक मेज़ होती जिस पर काफ़ी चाय के अलावा मीठे पकवान की प्लेट भी होती और जो भी जायरीन उनके सामने से गुजरता, उसे वे चाय पेश करते। जायरीन पैसा देना चाहते तो वे मना कर देते। इस तरह इन्सानी ख़िदमत के सबब वे पैग़ंबर रसूल ﷺ के मेहमानों के मेज़बान के तौर पर मशहूर थे। 

ख़ातून और सिक्योरिटी गार्ड के बीच हुई हाथापाई

    मदीना मुनव्वरा में मस्जिद नबवी ﷺ में एक ख़ातून और सिक्योरिटी गार्ड के दरमयान पिछले दिनों हुई हाथापाई का वीडियो सोशल मीडया पर वाइरल होने के बाद सऊदी हुक्काम का मौकूफ सामने आया है। तफ़सीलात के मुताबिक़ मस्जिद नबवी 000 में ख़ातून और सिक्योरिटी अहलकार के दरमयान पेश आने वाले वाकिये पर सऊदी जनरल डायरेक्टोरेट आफ़ पब्लिक सिक्योरिटी ने कहा कि महकमा मस्जिद नबवीﷺ  में एक खातून की जानिब से सिक्योरिटी अहलकार पर हमला करने वाले वाकिये की ताहकीकात की जा रही है। हुक्काम ने कहा कि जब कोई अहलकार अपने दायरा इख़तियार में ज़वाबत और हिदायात पर अमल दरआमद करने और ख़िलाफ़ वर्जियों का पता लगाने के अपने फ़राइज़ अंजाम दे रहा हो तो किसी सिक्योरिटी अफ़्सर पर हमला करना ममनू है, इन कार्यवाईयों को बड़े जराइम तसव्वुर किया जाता है जिनकी गिरफ़्तारी और सख़्त सज़ा दी जाती है।

ज़ाइरीन को 40 बरस से पिला रहे थे मुफ़्त चाय, मस्जिदे नबवी में खातून और सिक्योरिटी गार्ड के बीच हुई हाथापाई

 शव्वाल उल मुकर्रम, 1446 हिजरी 

   फरमाने रसूल   ﷺ    

"सिर्फ तीन जगह पर झूठ जाएज़ और हलाल है, एक ये के आदमी अपनी बीवी से बात करें ताकि उसको राज़ी कर ले, दूसरा जंग में झूठ बोलना और तीसरा लोगों के दरमियान सुलह कराने के लिए झूठ बोलना।"

- अबू दाऊद 

शाम के शहर हमाह से था मदीना मुनव्वरा में इन्सानियत की बेलौस ख़िदमत करने वाले शेख़ इस्माईल का ताल्लुक़ 

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बख्तावर अदब : मुस्लमानों के लिए दुनियाभर में दूसरे इंतिहाई मुक़द्दस शहर मदीना मुनव्वरा में 40 बरस से ज़ाइरीन को मुफ़्त चाय और क़हवा पिलाने वाले 96 साला शेख़ इस्माईल अलज़ाइम अब्बू इंतिक़ाल कर गए। शाम के शहर हमास से ताअल्लुक रखने वाले शेख इस्माईल गुजिश्ता पचास सालों से मदीना मुनव्वरा में मुकीम थे और हर आने वाले जाइरीन को मुफत चाय, काफी और खुजूर पेश किया करते थे। कभी-कभी ज़ाइरीन को वे अपने आबाई इलाक़े से आने वाली रिवायती मिठाईयां भी पेश करते थे।
    जानकारी के मुताबिक 96 साला बुज़ुर्ग शेख़ इस्माईल अलज़ाइम मस्जिद नबवी ﷺ के क़रीब एक प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठ जाते। उनके सामने एक मेज़ होती जिस पर काफ़ी चाय के अलावा मीठे पकवान की प्लेट भी होती और जो भी जायरीन उनके सामने से गुजरता, उसे वे चाय पेश करते। जायरीन पैसा देना चाहते तो वे मना कर देते। इस तरह इन्सानी ख़िदमत के सबब वे पैग़ंबर रसूल ﷺ के मेहमानों के मेज़बान के तौर पर मशहूर थे। 

ख़ातून और सिक्योरिटी गार्ड के बीच हुई हाथापाई

    मदीना मुनव्वरा में मस्जिद नबवी ﷺ में एक ख़ातून और सिक्योरिटी गार्ड के दरमयान पिछले दिनों हुई हाथापाई का वीडियो सोशल मीडया पर वाइरल होने के बाद सऊदी हुक्काम का मौकूफ सामने आया है। तफ़सीलात के मुताबिक़ मस्जिद नबवी 000 में ख़ातून और सिक्योरिटी अहलकार के दरमयान पेश आने वाले वाकिये पर सऊदी जनरल डायरेक्टोरेट आफ़ पब्लिक सिक्योरिटी ने कहा कि महकमा मस्जिद नबवीﷺ  में एक खातून की जानिब से सिक्योरिटी अहलकार पर हमला करने वाले वाकिये की ताहकीकात की जा रही है। हुक्काम ने कहा कि जब कोई अहलकार अपने दायरा इख़तियार में ज़वाबत और हिदायात पर अमल दरआमद करने और ख़िलाफ़ वर्जियों का पता लगाने के अपने फ़राइज़ अंजाम दे रहा हो तो किसी सिक्योरिटी अफ़्सर पर हमला करना ममनू है, इन कार्यवाईयों को बड़े जराइम तसव्वुर किया जाता है जिनकी गिरफ़्तारी और सख़्त सज़ा दी जाती है।

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Saturday, 26 April 2025

 शव्वाल उल मुकर्रम, 1446 हिजरी 

   फरमाने रसूल ﷺ   

"ऐसे शख्स की बददुआ से बचो जिस पर ज़ुल्म किया गया हो, इसलिए कि उसकी बददुआ और अल्लाह के दरमियान कोई आड़ नही होती।"

- तिर्मिज़ी 

पहलगाम में जां बहक होने वालों को पेश की खेराजे अकीदत, दिखाई एकजुटता

✅ नई तहरीक : भिलाई 

अल मदद एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी ने कश्मीर के पहलगाम में की गई नस्लकुशी के खिलाफ मुजाहिरा किया। सिविक सेंटर में हुए इस मुजाहिरे में आतंकवादी हमले में जान गंवाने वाले लोगों को मोमबत्ती जलाकर खेराजे अकीदत पेश की गई। 
    इस दौरान सोसायटी की प्रेसिडेंट अंजुम ने कहा कि मुश्किल की इस घड़ी में हम सब एकजुट हैं। इसमें कहीं भी जाति-मजहब की बिना पर भेद न किया जाए। सबसे पहले हम सब हिंदुस्तानी हैं और इंसानियत हमारा मजहब है। इस दौरान खुसूसी तौर पर सेक्रेटरी कौसर खान, नायब सदर शबाना सिद्दीकी, लीना तज़ीन, नरगिस, एसएन शेख, शमशुन, कैसर इकबाल, रेहाना, मिस्बाह हुसैन, रुखसाना सिद्दीकी और फरीदा अली समेत तंजीम की दीगर खवातीन मौजूद थीं। 

पहलगाम में जां बहक होने वालों को पेश की खेराजे अकीदत, दिखाई एकजुटता

 शव्वाल उल मुकर्रम, 1446 हिजरी 

   फरमाने रसूल ﷺ   

"ऐसे शख्स की बददुआ से बचो जिस पर ज़ुल्म किया गया हो, इसलिए कि उसकी बददुआ और अल्लाह के दरमियान कोई आड़ नही होती।"

- तिर्मिज़ी 

पहलगाम में जां बहक होने वालों को पेश की खेराजे अकीदत, दिखाई एकजुटता

✅ नई तहरीक : भिलाई 

अल मदद एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी ने कश्मीर के पहलगाम में की गई नस्लकुशी के खिलाफ मुजाहिरा किया। सिविक सेंटर में हुए इस मुजाहिरे में आतंकवादी हमले में जान गंवाने वाले लोगों को मोमबत्ती जलाकर खेराजे अकीदत पेश की गई। 
    इस दौरान सोसायटी की प्रेसिडेंट अंजुम ने कहा कि मुश्किल की इस घड़ी में हम सब एकजुट हैं। इसमें कहीं भी जाति-मजहब की बिना पर भेद न किया जाए। सबसे पहले हम सब हिंदुस्तानी हैं और इंसानियत हमारा मजहब है। इस दौरान खुसूसी तौर पर सेक्रेटरी कौसर खान, नायब सदर शबाना सिद्दीकी, लीना तज़ीन, नरगिस, एसएन शेख, शमशुन, कैसर इकबाल, रेहाना, मिस्बाह हुसैन, रुखसाना सिद्दीकी और फरीदा अली समेत तंजीम की दीगर खवातीन मौजूद थीं। 

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 शव्वाल उल मुकर्रम, 1446 हिजरी 

   फरमाने रसूल     

जो चीज़ सबसे ज़्यादा लोगों को जन्नत में दाखिल करेगी, वह ख़ौफ-ए-खुदा और हुस्न अखलाक है।

- तिर्मिज़ी 

मआशरे ने मौन रैली निकाल अपर कलेक्टर ठाकुर को सौंपा मेमोरेंडम, पहलगाम हादसे के कसूरवारों को कड़ी सजा देने का किया मुतालबा 

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✅ नई तहरीक : खैरागढ़

जिला मुस्लिम मआशरा केसीजी ने आतंकवादियो के खिलाफ सख्त कार्रवाई का मुतालबा करते हुए बरोज जुमा, 25 अप्रैल को बाद नमाजे जुमा मस्जिद चौक से मौन जुलूस निकाला जो जय स्तंभ चौक, आंबेडकर चौक होते हुए कलेक्टोरेट पहुंचा जहां मआशरे ने सदर द्रोपदी मूर्मू के नाम कलेक्टर को मेमोरेंडम सौंपा। 
    
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    मआशरे ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी मजम्मत करते हुए कहा कि कश्मीर के पहलगाम में दहशतगर्दों की जानिब से किए गए कायराना हमले में 27 बेकसूर शहरियों की जाने चली गई। दहशतगर्दों के हमले ने पूरे मुल्क को झकझोर कर रख दिया है। जिला खैरागढ़, छुईखदान, गंडई (केसीजी) का मुस्लिम मआशरा भी हमले से रंजीदा है। इस दौरान जिला मुस्लिम समाज के सदर सज्जाक खान, खैरागढ़ नपा के नायब सदर अब्दुल रज्जाक खान, जिला नायब सदर अरशद हुसैन, बानी जफर हुसैन खान, शमशुल होदा खान, जिला महामंत्री व गंडई सदर जाबिद खान, जिला मुस्लिम समाज के खजांची हाज़ी रिज़वान मेमन, खलील कुरैशी, जिला मुस्लिम समाज के सेक्रेटरी मोहम्मद याहिया नियाज़ी, छुईखदान सदर निजामुद्दीन खान, फारुख मेमन, शेख कलीम खान, असीर खान, नसीम खान, डॉ. मकसूद अहमद, याकूब खान, सैय्यद अल्ताफ अली, जुनैद खान, अय्यूब सोलंकी व नदीम मेमन, हाजी तनवीर मेमन, हाजी मुर्तजा खान, रहीम बख्श, अमीन मेमन, मतीन अशरफ़, सलीम सोलंकी, इरफ़ान मेमन, शकील सोलंकी, जाफर झाड़ूदिया, सादिक मोतीवाला, तारिक अमान, राजा सोलंकी, लक्की सोलंकी, बाबू खान, सद्दाम मेमन, माजिद खान, इरशाद खान, शेख जाहिद, तालिब मेमन व फारुख सोलंकी सहित सैकड़ों की तादाद में मौजूद लोगों ने दहशतगर्दों की इस कायराना हरकत की पुरजोर मजम्मत करते हुये राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के नाम कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल की गैर मौजूदगी में अपर कलेक्टर सुरेंद्र सिंह ठाकुर को सौंपे ज्ञापन में कहा कि हम भारत सरकार से अपील करते है कि आतंकवादियो के खिलाफ कठोर कार्यवाही करते हुए उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाए और इन्हें पनाह देने वाले देश पाकिस्तान के खिलाफ भी कड़ी कार्रवई की जाए। 
    रैली में शामिल लोगों ने कलेक्टोरेट पहुंचने तक पाकिस्तान मुर्दाबाद, आतंकवाद मुर्दाबाद और हिंदुस्तान जिंदाबाद की तख्ती लिए हुए थे। इस दौरान वे आतंकवाद मुर्दाबाद और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे।

मस्जिद चौक से निकला जुलूस, गूंजा पाकिस्तान मुर्दाबाद का नारा, दहशतगर्दों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का मुतालबा

 शव्वाल उल मुकर्रम, 1446 हिजरी 

   फरमाने रसूल     

जो चीज़ सबसे ज़्यादा लोगों को जन्नत में दाखिल करेगी, वह ख़ौफ-ए-खुदा और हुस्न अखलाक है।

- तिर्मिज़ी 

मआशरे ने मौन रैली निकाल अपर कलेक्टर ठाकुर को सौंपा मेमोरेंडम, पहलगाम हादसे के कसूरवारों को कड़ी सजा देने का किया मुतालबा 

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✅ नई तहरीक : खैरागढ़

जिला मुस्लिम मआशरा केसीजी ने आतंकवादियो के खिलाफ सख्त कार्रवाई का मुतालबा करते हुए बरोज जुमा, 25 अप्रैल को बाद नमाजे जुमा मस्जिद चौक से मौन जुलूस निकाला जो जय स्तंभ चौक, आंबेडकर चौक होते हुए कलेक्टोरेट पहुंचा जहां मआशरे ने सदर द्रोपदी मूर्मू के नाम कलेक्टर को मेमोरेंडम सौंपा। 
    
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    मआशरे ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी मजम्मत करते हुए कहा कि कश्मीर के पहलगाम में दहशतगर्दों की जानिब से किए गए कायराना हमले में 27 बेकसूर शहरियों की जाने चली गई। दहशतगर्दों के हमले ने पूरे मुल्क को झकझोर कर रख दिया है। जिला खैरागढ़, छुईखदान, गंडई (केसीजी) का मुस्लिम मआशरा भी हमले से रंजीदा है। इस दौरान जिला मुस्लिम समाज के सदर सज्जाक खान, खैरागढ़ नपा के नायब सदर अब्दुल रज्जाक खान, जिला नायब सदर अरशद हुसैन, बानी जफर हुसैन खान, शमशुल होदा खान, जिला महामंत्री व गंडई सदर जाबिद खान, जिला मुस्लिम समाज के खजांची हाज़ी रिज़वान मेमन, खलील कुरैशी, जिला मुस्लिम समाज के सेक्रेटरी मोहम्मद याहिया नियाज़ी, छुईखदान सदर निजामुद्दीन खान, फारुख मेमन, शेख कलीम खान, असीर खान, नसीम खान, डॉ. मकसूद अहमद, याकूब खान, सैय्यद अल्ताफ अली, जुनैद खान, अय्यूब सोलंकी व नदीम मेमन, हाजी तनवीर मेमन, हाजी मुर्तजा खान, रहीम बख्श, अमीन मेमन, मतीन अशरफ़, सलीम सोलंकी, इरफ़ान मेमन, शकील सोलंकी, जाफर झाड़ूदिया, सादिक मोतीवाला, तारिक अमान, राजा सोलंकी, लक्की सोलंकी, बाबू खान, सद्दाम मेमन, माजिद खान, इरशाद खान, शेख जाहिद, तालिब मेमन व फारुख सोलंकी सहित सैकड़ों की तादाद में मौजूद लोगों ने दहशतगर्दों की इस कायराना हरकत की पुरजोर मजम्मत करते हुये राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के नाम कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल की गैर मौजूदगी में अपर कलेक्टर सुरेंद्र सिंह ठाकुर को सौंपे ज्ञापन में कहा कि हम भारत सरकार से अपील करते है कि आतंकवादियो के खिलाफ कठोर कार्यवाही करते हुए उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाए और इन्हें पनाह देने वाले देश पाकिस्तान के खिलाफ भी कड़ी कार्रवई की जाए। 
    रैली में शामिल लोगों ने कलेक्टोरेट पहुंचने तक पाकिस्तान मुर्दाबाद, आतंकवाद मुर्दाबाद और हिंदुस्तान जिंदाबाद की तख्ती लिए हुए थे। इस दौरान वे आतंकवाद मुर्दाबाद और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाते रहे।

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Wednesday, 23 April 2025

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सीरत-ए- बेमिसाल मिलन व सहाफियों के एजाजिया तकरीब में सहाफियों समेत एजाज से नवाजे गए बच्चे व सोशल वर्कर्स 
विधायक लहरिया बोले, बच्चे मुल्क का मुस्तकबिल और सहाफी समाज का आइना
संपादक 8, न्यूज सीजी शेख असलम के काम को सराहा

✅ नई तहरीक : बिलासपुर 

गुजिश्ता दिनों सिम्स ऑडिटोरियम में मुनाकिद सीरत-ए-बेमिसाल मिलन व सहाफी एजाजिया तकरीब में सहाफियों समेत मुख्तलिफ शोबों में बेहतर काम करने वाले बच्चों व सोशल वर्कर्स को एजाज से नवाजा गया। मेहमाने खुसूसी मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया, मेहमाने खास राजेश सूर्यवंशी, सदर जिला पंचायत, कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉक्टर शिल्पा कौशिक और सर्व आदिवासी समाज के सदर राजीव ध्रुव थे। तकरीब की शुरुआत दीप जलाने से हुई। जिसके बाद मुदीरे आला (संपादक) असलम शेख ने गुलदस्ता भेंटकर मेहमानों का इस्तकबाल किया। 

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    मेहमाने खुसूसी विधायक लहरिया ने तकरीब से खिताब करते हुए तकरीब को यादगार बताते हुए कहा कि इसके जरिये अपने-अपने हल्के में बेहतर काम करने वालों को एजाज से नवाजा जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि मंच ही एक ऐसी जगह है जहां लोगों को एकजुट होने का मौका मिलता है। 
    उन्होंने कहा, एक ओर बच्चे मुल्क का नाम रोशन कर रहे है तो दूसरी ओर सहाफी जम्हूरियत के चौथे सुतून के तौर पर मुल्क की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं। जिला पंचायत सदर राजेश सूर्यवंशी ने कहा कि इस तरह की तकरीब समूची रियासत में जगह-जगह मुनाकिद की जानी चाहिए। उन्होंने अपने चेनल के जरिये लोगों को एक सूत्र में बांधे रखने की संपादक शेख असलम की कोशिशों को सराहा। कृषि विज्ञान केन्द्र की साइंटिस्ट डॉक्टर शिल्पा कौशिक ने मुख्तलिफ इम्तेहान में अपनी कारकर्दगी का बेहतर मुजाहिरा करने वाले बच्चों की मेहनत को सराहा। उन्होंने कहा, शहर के होनहार बच्चों ने रियासत में शहर का नाम रोशन किया है। सहाफियों से खिताब करते हुए उन्होंने कहा, सहाफत आसान नहीं है। कई बार खबरों के लिए सहाफियों को अपनी जान जोखिम में डालना पड़ जाता है। 
    फ्यूचर साइन इंग्लिश मीडियम स्कूल की सुमैया फातिमा ने आईपीएस के मौजूद पर लोगों को खिताब किया। सुमैया ने बड़ी होकर आईपीएस बनकर मुल्क की खिदमत करने के अपने अज्म का इजहार किया। तकरीब में फ्यूचर शाईन इंग्लिश मीडियम स्कूल के प्रिंसिपल इमरान, महेंद्र मोनू, कमलेश लवहात्रे, विनय शुक्ला और दिलीप अग्रवाल तकरीबन 500 लोगों ने शिरकत की। 

ये नवाजे गए

    तकरीब के दौरान वैदिक न्यूज की एमडी सैयद सलमा, पर्वतारोही निशू सिंह, बॉक्सिंग इंटरनेशनल खिलाड़ी अंकुर यादव, अब्दुल शमीम, सैयद ताजुद्दीन, किरण मोईत्रा, अजीता पाण्डेय, अंकिता शुक्ला, नीरज गेमनानी, मितवा महिला कल्याण सेवा समिति, स्वाति गुप्ता भवन की टीम, दीपक शर्मा व उनकी टीम, कमांडर महाविद्यालय एनएसएस एनसीसी की टीम, आजाद युवा संगठन, शाह कुरैशी व टीम, सद्भाव पत्रकार संघ, श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ, प्रेस क्लब के सीनियर सहाफी लोकेश वाघमारे, विनय मिश्रा, दिलीप अग्रवाल, कमलेश लोहात्रे, मनीष शर्मा, गुड्डा सदाफले, कमांडर महाविद्यालय के एनएसएस, एनसीसी छात्र-छात्राओं के साथ प्रबंधक रोहित लहरे, जीएसटी बार एसोसिएशन के जिला सदर सुरेश शुक्ला, शिक्षा विभाग में बेहतर काम के लिए विकास कायरवार, अवधेश विमल, रेवती यादव, शिवसेना महिला जिला सदर बिलासपुर, सुनीता ध्रुव, बीएमओ बिल्हा विकासखंड, नीरज मखीजा, नीरज शुक्ला, संजीव ठाकुर, जिया खान, विनय शुक्ला, कमलेश लव्हात्रे के अलावा एंकर भारती यादव, नेहा शर्मा, जागृति, प्रज्ञा, रमा, सृष्टि सिंह, रिपोर्टर प्रियंका सिंह, ऋतु साहू, मधु शर्मा, मधु खान और काजल किरण और सीनियर सहाफियों के साथ तकरीबन 400 लोगों को एजाज से नवाजा गया। 


बेहतर काम के लिए एजाज से नवाजी गई वैदिक ग्रुप की एमडी सलमा

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सीरत-ए- बेमिसाल मिलन व सहाफियों के एजाजिया तकरीब में सहाफियों समेत एजाज से नवाजे गए बच्चे व सोशल वर्कर्स 
विधायक लहरिया बोले, बच्चे मुल्क का मुस्तकबिल और सहाफी समाज का आइना
संपादक 8, न्यूज सीजी शेख असलम के काम को सराहा

✅ नई तहरीक : बिलासपुर 

गुजिश्ता दिनों सिम्स ऑडिटोरियम में मुनाकिद सीरत-ए-बेमिसाल मिलन व सहाफी एजाजिया तकरीब में सहाफियों समेत मुख्तलिफ शोबों में बेहतर काम करने वाले बच्चों व सोशल वर्कर्स को एजाज से नवाजा गया। मेहमाने खुसूसी मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया, मेहमाने खास राजेश सूर्यवंशी, सदर जिला पंचायत, कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉक्टर शिल्पा कौशिक और सर्व आदिवासी समाज के सदर राजीव ध्रुव थे। तकरीब की शुरुआत दीप जलाने से हुई। जिसके बाद मुदीरे आला (संपादक) असलम शेख ने गुलदस्ता भेंटकर मेहमानों का इस्तकबाल किया। 

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    मेहमाने खुसूसी विधायक लहरिया ने तकरीब से खिताब करते हुए तकरीब को यादगार बताते हुए कहा कि इसके जरिये अपने-अपने हल्के में बेहतर काम करने वालों को एजाज से नवाजा जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि मंच ही एक ऐसी जगह है जहां लोगों को एकजुट होने का मौका मिलता है। 
    उन्होंने कहा, एक ओर बच्चे मुल्क का नाम रोशन कर रहे है तो दूसरी ओर सहाफी जम्हूरियत के चौथे सुतून के तौर पर मुल्क की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं। जिला पंचायत सदर राजेश सूर्यवंशी ने कहा कि इस तरह की तकरीब समूची रियासत में जगह-जगह मुनाकिद की जानी चाहिए। उन्होंने अपने चेनल के जरिये लोगों को एक सूत्र में बांधे रखने की संपादक शेख असलम की कोशिशों को सराहा। कृषि विज्ञान केन्द्र की साइंटिस्ट डॉक्टर शिल्पा कौशिक ने मुख्तलिफ इम्तेहान में अपनी कारकर्दगी का बेहतर मुजाहिरा करने वाले बच्चों की मेहनत को सराहा। उन्होंने कहा, शहर के होनहार बच्चों ने रियासत में शहर का नाम रोशन किया है। सहाफियों से खिताब करते हुए उन्होंने कहा, सहाफत आसान नहीं है। कई बार खबरों के लिए सहाफियों को अपनी जान जोखिम में डालना पड़ जाता है। 
    फ्यूचर साइन इंग्लिश मीडियम स्कूल की सुमैया फातिमा ने आईपीएस के मौजूद पर लोगों को खिताब किया। सुमैया ने बड़ी होकर आईपीएस बनकर मुल्क की खिदमत करने के अपने अज्म का इजहार किया। तकरीब में फ्यूचर शाईन इंग्लिश मीडियम स्कूल के प्रिंसिपल इमरान, महेंद्र मोनू, कमलेश लवहात्रे, विनय शुक्ला और दिलीप अग्रवाल तकरीबन 500 लोगों ने शिरकत की। 

ये नवाजे गए

    तकरीब के दौरान वैदिक न्यूज की एमडी सैयद सलमा, पर्वतारोही निशू सिंह, बॉक्सिंग इंटरनेशनल खिलाड़ी अंकुर यादव, अब्दुल शमीम, सैयद ताजुद्दीन, किरण मोईत्रा, अजीता पाण्डेय, अंकिता शुक्ला, नीरज गेमनानी, मितवा महिला कल्याण सेवा समिति, स्वाति गुप्ता भवन की टीम, दीपक शर्मा व उनकी टीम, कमांडर महाविद्यालय एनएसएस एनसीसी की टीम, आजाद युवा संगठन, शाह कुरैशी व टीम, सद्भाव पत्रकार संघ, श्रमजीवी पत्रकार कल्याण संघ, प्रेस क्लब के सीनियर सहाफी लोकेश वाघमारे, विनय मिश्रा, दिलीप अग्रवाल, कमलेश लोहात्रे, मनीष शर्मा, गुड्डा सदाफले, कमांडर महाविद्यालय के एनएसएस, एनसीसी छात्र-छात्राओं के साथ प्रबंधक रोहित लहरे, जीएसटी बार एसोसिएशन के जिला सदर सुरेश शुक्ला, शिक्षा विभाग में बेहतर काम के लिए विकास कायरवार, अवधेश विमल, रेवती यादव, शिवसेना महिला जिला सदर बिलासपुर, सुनीता ध्रुव, बीएमओ बिल्हा विकासखंड, नीरज मखीजा, नीरज शुक्ला, संजीव ठाकुर, जिया खान, विनय शुक्ला, कमलेश लव्हात्रे के अलावा एंकर भारती यादव, नेहा शर्मा, जागृति, प्रज्ञा, रमा, सृष्टि सिंह, रिपोर्टर प्रियंका सिंह, ऋतु साहू, मधु शर्मा, मधु खान और काजल किरण और सीनियर सहाफियों के साथ तकरीबन 400 लोगों को एजाज से नवाजा गया। 


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✅ रेशमा फातिमा : रायपुर 

भारत का सांस्कृतिक परिदृश्य विविध परंपराओं, भाषाओं, धर्मों और कला रूपों का मिश्रण है, जो हज़ारों वर्षों से सह-अस्तित्व में हैं और विकसित हुआ है। पीढ़ियों से चली आ रही ये साझा सांस्कृतिक विरासत गर्व के प्रतीक से कहीं ज़्यादा है और भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश है। तेज़ी से बदलती दुनिया में, भारत एक ज़्यादा समावेशी, टिकाऊ और सशक्त समाज बनाने के लिए अपने अतीत की प्रासंगिकता को फिर से खोज रहा है। 
    भारत की विरासत के सबसे गहन पहलुओं में से एक यह विचार है सह-अस्तित्व का। पूरे इतिहास में, भारत ने हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म से लेकर इस्लाम, ईसाई, सिख, जैन धर्म और आदिवासी मान्यताओं तक कई पहचानों को अपनाया है। भक्ति और सूफी आंदोलन इस साझा आध्यात्मिक यात्रा के प्रमुख उदाहरण हैं। कबीर और गुरु नानक जैसे संतों ने धार्मिक और जातिगत विभाजनों से ऊपर उठकर एकता, करुणा और समानता का उपदेश दिया। इस साझा संस्कृति के भौतिक स्थान-अजमेर शरीफ, वाराणसी के घाट, तमिलनाडु के मंदिर और पंजाब के गुरुद्वारे, सद्भाव के स्थल बने हुए हैं, जहाँ सभी पृष्ठभूमि के लोग एक साथ आते हैं। 
    ये सिर्फ़ स्मारक नहीं हैं; ये सांस्कृतिक संवाद के जीवंत प्रतीक हैं। भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, आयुर्वेद, योग, वास्तु शास्त्र और टिकाऊ खेती का आधुनिक चुनौतियों के संदर्भ में पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है। कभी ग्रामीण या धार्मिक परिवेश तक सीमित रहने वाली प्रथाएँ अब स्वास्थ्य, जलवायु और माइंडफुलनेस पर वैश्विक बातचीत में प्रवेश कर रही हैं। उदाहरण के लिए, योग का वैश्विक आलिंगन, जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के साथ मान्यता दी गई है, भारत की समग्र कल्याण की प्राचीन समझ में निहित है। इसी तरह, पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों जैसे बावड़ी, बावड़ी और टैंक सिंचाई को जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे के मॉडल के रूप में फिर से देखा जा रहा है। 
    भारत की साझा विरासत इसके विविध कला रूपों में भी दिखाई देती है। मधुबनी, वारली और पट्टचित्र जैसे पारंपरिक शिल्प और कथक, भरतनाट्यम और बाउल संगीत जैसी प्रदर्शन कलाएँ सामूहिक स्मृति और क्षेत्रीय पहचान की कहानियाँ बताती हैं। हाल के वर्षों में, इन लुप्त होती कलाओं को पुनर्जीवित करने के लिए एक सचेत प्रयास किया गया है। सरकारी योजनाएँ, ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म और डिज़ाइन सहयोग कारीगर समुदायों में नई जान फूंक रहे हैं, जिनमें से कई ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर पड़े समूहों से संबंधित हैं। यह पुनरुद्धार न केवल संस्कृति को संरक्षित कर रहा है बल्कि आजीविका भी पैदा कर रहा है, खासकर ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए।
    साझा सांस्कृतिक विरासत शांतिपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए एक सेतु के रूप में भी उभरी है। नेपाल, भूटान बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंध बौद्ध धर्म से लेकर भाषा और खान-पान तक साझा धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं में निहित हैं। नालंदा विश्वविद्यालय के जीर्णोद्धार और दक्षिण एशिया में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों पर सहयोग जैसी पहल दर्शाती है कि कैसे साझा विरासत राजनीतिक सीमाओं को पार कर सकती है और आपसी सम्मान को बढ़ावा दे सकती है। ये प्रयास वैश्विक दक्षिण में एक सांस्कृतिक नेता के रूप में भारत की छवि को मजबूत करते हैं। भारतीय शिक्षा हमेशा से संस्कृति के संचार का माध्यम रही है। आज, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, क्षेत्रीय इतिहास और स्थानीय भाषाओं को मुख्यधारा की शिक्षा में एकीकृत करने पर जोर देती है। यह नया फोकस सुनिश्चित करता है कि युवा भारतीय न केवल अपनी विरासत की सराहना करें बल्कि भविष्य के लिए इसे नया रूप देने और अनुकूलित करने के लिए भी सुसज्जित हों। 
    कक्षाओं में कहानी सुनाने के सत्रों से लेकर शहरों में हेरिटेज वॉक तक, सांस्कृतिक शिक्षा को अनुभवात्मक और समावेशी बनाने के लिए एक बढ़ता हुआ आंदोलन है। जब बच्चे अपनी विरासत के बारे में इस तरह से सीखते हैं जो उनके रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा होता है, तो इससे पहचान और अपनेपन की गहरी भावना पैदा होती है।

स्थिर नहीं है भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत 

यह एक जीवंत, सांस लेने वाली शक्ति है जो निरंतर विकसित और प्रेरित करती रहती है। आध्यात्मिक शिक्षाओं और प्राचीन विज्ञानों से लेकर कला रूपों और वास्तुकला तक, अतीत के ज्ञान को एक उज्जवल, अधिक दयालु भविष्य को आकार देने के लिए पुनर्व्याख्यायित किया जा रहा है।

- अंतर्राष्ट्रीय संबंध में परास्नातक, 
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय



साझी सांस्कृतिक विरासत : उज्जवल भविष्य की ओर ले जाते अतीत के उदाहरण

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✅ रेशमा फातिमा : रायपुर 

भारत का सांस्कृतिक परिदृश्य विविध परंपराओं, भाषाओं, धर्मों और कला रूपों का मिश्रण है, जो हज़ारों वर्षों से सह-अस्तित्व में हैं और विकसित हुआ है। पीढ़ियों से चली आ रही ये साझा सांस्कृतिक विरासत गर्व के प्रतीक से कहीं ज़्यादा है और भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश है। तेज़ी से बदलती दुनिया में, भारत एक ज़्यादा समावेशी, टिकाऊ और सशक्त समाज बनाने के लिए अपने अतीत की प्रासंगिकता को फिर से खोज रहा है। 
    भारत की विरासत के सबसे गहन पहलुओं में से एक यह विचार है सह-अस्तित्व का। पूरे इतिहास में, भारत ने हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म से लेकर इस्लाम, ईसाई, सिख, जैन धर्म और आदिवासी मान्यताओं तक कई पहचानों को अपनाया है। भक्ति और सूफी आंदोलन इस साझा आध्यात्मिक यात्रा के प्रमुख उदाहरण हैं। कबीर और गुरु नानक जैसे संतों ने धार्मिक और जातिगत विभाजनों से ऊपर उठकर एकता, करुणा और समानता का उपदेश दिया। इस साझा संस्कृति के भौतिक स्थान-अजमेर शरीफ, वाराणसी के घाट, तमिलनाडु के मंदिर और पंजाब के गुरुद्वारे, सद्भाव के स्थल बने हुए हैं, जहाँ सभी पृष्ठभूमि के लोग एक साथ आते हैं। 
    ये सिर्फ़ स्मारक नहीं हैं; ये सांस्कृतिक संवाद के जीवंत प्रतीक हैं। भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, आयुर्वेद, योग, वास्तु शास्त्र और टिकाऊ खेती का आधुनिक चुनौतियों के संदर्भ में पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है। कभी ग्रामीण या धार्मिक परिवेश तक सीमित रहने वाली प्रथाएँ अब स्वास्थ्य, जलवायु और माइंडफुलनेस पर वैश्विक बातचीत में प्रवेश कर रही हैं। उदाहरण के लिए, योग का वैश्विक आलिंगन, जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के साथ मान्यता दी गई है, भारत की समग्र कल्याण की प्राचीन समझ में निहित है। इसी तरह, पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों जैसे बावड़ी, बावड़ी और टैंक सिंचाई को जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे के मॉडल के रूप में फिर से देखा जा रहा है। 
    भारत की साझा विरासत इसके विविध कला रूपों में भी दिखाई देती है। मधुबनी, वारली और पट्टचित्र जैसे पारंपरिक शिल्प और कथक, भरतनाट्यम और बाउल संगीत जैसी प्रदर्शन कलाएँ सामूहिक स्मृति और क्षेत्रीय पहचान की कहानियाँ बताती हैं। हाल के वर्षों में, इन लुप्त होती कलाओं को पुनर्जीवित करने के लिए एक सचेत प्रयास किया गया है। सरकारी योजनाएँ, ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म और डिज़ाइन सहयोग कारीगर समुदायों में नई जान फूंक रहे हैं, जिनमें से कई ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर पड़े समूहों से संबंधित हैं। यह पुनरुद्धार न केवल संस्कृति को संरक्षित कर रहा है बल्कि आजीविका भी पैदा कर रहा है, खासकर ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए।
    साझा सांस्कृतिक विरासत शांतिपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए एक सेतु के रूप में भी उभरी है। नेपाल, भूटान बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंध बौद्ध धर्म से लेकर भाषा और खान-पान तक साझा धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं में निहित हैं। नालंदा विश्वविद्यालय के जीर्णोद्धार और दक्षिण एशिया में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों पर सहयोग जैसी पहल दर्शाती है कि कैसे साझा विरासत राजनीतिक सीमाओं को पार कर सकती है और आपसी सम्मान को बढ़ावा दे सकती है। ये प्रयास वैश्विक दक्षिण में एक सांस्कृतिक नेता के रूप में भारत की छवि को मजबूत करते हैं। भारतीय शिक्षा हमेशा से संस्कृति के संचार का माध्यम रही है। आज, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, क्षेत्रीय इतिहास और स्थानीय भाषाओं को मुख्यधारा की शिक्षा में एकीकृत करने पर जोर देती है। यह नया फोकस सुनिश्चित करता है कि युवा भारतीय न केवल अपनी विरासत की सराहना करें बल्कि भविष्य के लिए इसे नया रूप देने और अनुकूलित करने के लिए भी सुसज्जित हों। 
    कक्षाओं में कहानी सुनाने के सत्रों से लेकर शहरों में हेरिटेज वॉक तक, सांस्कृतिक शिक्षा को अनुभवात्मक और समावेशी बनाने के लिए एक बढ़ता हुआ आंदोलन है। जब बच्चे अपनी विरासत के बारे में इस तरह से सीखते हैं जो उनके रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा होता है, तो इससे पहचान और अपनेपन की गहरी भावना पैदा होती है।

स्थिर नहीं है भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत 

यह एक जीवंत, सांस लेने वाली शक्ति है जो निरंतर विकसित और प्रेरित करती रहती है। आध्यात्मिक शिक्षाओं और प्राचीन विज्ञानों से लेकर कला रूपों और वास्तुकला तक, अतीत के ज्ञान को एक उज्जवल, अधिक दयालु भविष्य को आकार देने के लिए पुनर्व्याख्यायित किया जा रहा है।

- अंतर्राष्ट्रीय संबंध में परास्नातक, 
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय



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Saturday, 19 April 2025

 शव्वाल उल मुकर्रम, 1446 हिजरी 

   फरमाने रसूल ﷺ   

"अल्लाह ताअला फरमाता है: मेरा बंदा किसी और चीज़ के जरिये मुझ से इतना करीब नहीं होता, जितना फर्ज़ इबादत के जरिये होता है।"

- सहीह बुखारी 

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                                                                          File Photo

    नई तहरीक : लवाहिक़ीन (मरने वाले के परिजन) ने क़ातिल को इस शर्त पर माफी दे दी कि वो डेढ़ साल के दौरान ताइफ में मक़्तूल (मृतक) के नाम से एक मस्जिद तामीर कराएगा। मस्जिद की ताअमीर पूरी होने के बाद मस्जिद को वज़ारत मज़हबी उमूर के हवाले कर दिया जाएगा। 
    सऊदी मीडीया के मुताबिक़ ताइफ की एक फ़ौजदारी अदालत ने कत्ल के एक केस का फ़ैसला सुनाते हुए मक़्तूल के लवाहिक़ीन की तरफ़ से क़ातिल को माफ़ करने की दरख़ास्त मंज़ूर कर ली जिसमें मक़्तूल के लवाहिक़ीन ने ये शर्त रखी कि कातिल मक्तूल के नाम पर डेढ़ साल के दौरान ताइफ में एक मस्जिद तामीर करवाएगा और उसे मुकम्मल करने के बाद वज़ारत मज़हबी उमूर के हवाले कर देगा।
    जानकारी के मुताबिक सुनवाई के दौरान फ़रीक़ैन (दोनों पक्षों) के दरमयान अदालत की निगरानी में ये मुआहिदा तै पाया गया। माफ़ी मिलने के बाद क़ातिल की जानिब से मक़्तूल के लवाहिक़ीन और अदालत का शुक्रिया अदा किया गया।

कत्ल कर लाश जलाने वाले को सजा-ए-मौत

    दूसरी तरफ़ सऊदी अरब में एक ख़ातून को कत्ल कर उसकी लाश जलाने वाले ग़ैरमुल्की को सज़ा-ए-मौत दे दी गई। ये मामला ममलकत में मुक़ीम एक ग़ैरमुल्की ख़ातून के कत्ल का है जिसे मिस्री शहरी कत्ल कर दिया था और उसकी लाश को जला दिया था। कसूरवार पाए जाने पर मुजरिम को मदीना मुनव्वरा रीजन में सज़ा-ए-मौत दी गई।
    इस सिलसिले में सऊदी अरब की वज़ारत-ए-दाख़िला की जानिब से जारी बयान में कहा गया है कि मिस्र के शहरी ने गै़रक़ानूनी तौर पर सऊदी अरब में मुक़ीम एक ग़ैर मुल्की ख़ातून को क़तल करने के बाद वारदात छिपाने के लिए उसकी लाश को जला डाला था हालांकि सिक्योरिटी फ़ोर्स ने मिस्री शहरी को तलाश कर गिरफ़्तार कर लिया था। मज़कूरा शख़्स को फ़ौजदारी अदालत में पेश किया गया जहां उस पर क़तल का इल्ज़ाम साबित होने पर उसे मौत की सज़ा दी गई। 

सऊदी अरब : मस्जिद बनाने की शर्त पर क़ातिल को मिल गई माफी

 शव्वाल उल मुकर्रम, 1446 हिजरी 

   फरमाने रसूल ﷺ   

"अल्लाह ताअला फरमाता है: मेरा बंदा किसी और चीज़ के जरिये मुझ से इतना करीब नहीं होता, जितना फर्ज़ इबादत के जरिये होता है।"

- सहीह बुखारी 

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                                                                          File Photo

    नई तहरीक : लवाहिक़ीन (मरने वाले के परिजन) ने क़ातिल को इस शर्त पर माफी दे दी कि वो डेढ़ साल के दौरान ताइफ में मक़्तूल (मृतक) के नाम से एक मस्जिद तामीर कराएगा। मस्जिद की ताअमीर पूरी होने के बाद मस्जिद को वज़ारत मज़हबी उमूर के हवाले कर दिया जाएगा। 
    सऊदी मीडीया के मुताबिक़ ताइफ की एक फ़ौजदारी अदालत ने कत्ल के एक केस का फ़ैसला सुनाते हुए मक़्तूल के लवाहिक़ीन की तरफ़ से क़ातिल को माफ़ करने की दरख़ास्त मंज़ूर कर ली जिसमें मक़्तूल के लवाहिक़ीन ने ये शर्त रखी कि कातिल मक्तूल के नाम पर डेढ़ साल के दौरान ताइफ में एक मस्जिद तामीर करवाएगा और उसे मुकम्मल करने के बाद वज़ारत मज़हबी उमूर के हवाले कर देगा।
    जानकारी के मुताबिक सुनवाई के दौरान फ़रीक़ैन (दोनों पक्षों) के दरमयान अदालत की निगरानी में ये मुआहिदा तै पाया गया। माफ़ी मिलने के बाद क़ातिल की जानिब से मक़्तूल के लवाहिक़ीन और अदालत का शुक्रिया अदा किया गया।

कत्ल कर लाश जलाने वाले को सजा-ए-मौत

    दूसरी तरफ़ सऊदी अरब में एक ख़ातून को कत्ल कर उसकी लाश जलाने वाले ग़ैरमुल्की को सज़ा-ए-मौत दे दी गई। ये मामला ममलकत में मुक़ीम एक ग़ैरमुल्की ख़ातून के कत्ल का है जिसे मिस्री शहरी कत्ल कर दिया था और उसकी लाश को जला दिया था। कसूरवार पाए जाने पर मुजरिम को मदीना मुनव्वरा रीजन में सज़ा-ए-मौत दी गई।
    इस सिलसिले में सऊदी अरब की वज़ारत-ए-दाख़िला की जानिब से जारी बयान में कहा गया है कि मिस्र के शहरी ने गै़रक़ानूनी तौर पर सऊदी अरब में मुक़ीम एक ग़ैर मुल्की ख़ातून को क़तल करने के बाद वारदात छिपाने के लिए उसकी लाश को जला डाला था हालांकि सिक्योरिटी फ़ोर्स ने मिस्री शहरी को तलाश कर गिरफ़्तार कर लिया था। मज़कूरा शख़्स को फ़ौजदारी अदालत में पेश किया गया जहां उस पर क़तल का इल्ज़ाम साबित होने पर उसे मौत की सज़ा दी गई। 

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Tuesday, 15 April 2025

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सालाना उर्स पार्क (एकता उत्सव) की तकरीब के पोस्टर का अमल में आया रस्मे इजरा

✅ नई तहरीक : दुर्ग 

हजरत बाबा सैयद अब्दुल रहमान शाह काबुली रहमतुल्ला अलैह, पुराना बस स्टैंड का सालाना उर्स पाक (एकता उत्सव ) 13 मई से शुरू होने जा रहा है। उर्सपाक को लेकर गुजिश्ता दिनों मुनाकिद बैठक में उर्सपाक की तकरीब के पोस्टर का रस्मे इजरा अमल में आया। बैठक की सदारत उर्सपाक कमेटी के सदर प्रकाश देशलहरा ने की। 
    बैठक से खिताब करते हुए उन्होंने कहा कि काबुली बाबा का उर्स पाक न केवल रियासत छत्तीसगढ़ बल्कि दीगर प्रांतो में भी खासी अहमियत रखता है,  भाईचारा, प्यार, हम आहंगी और यकजहती का पैगाम देने वाले काबुली दरबार के उर्सपाक में सभी मजाहिब के लोग पूरी अकीदत से शामिल होते हैं। 

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  •     कमेटी के जनरल सेक्रेटरी रऊफ कुरेशी ने तकरीब की तफसीली जानकारी देते हुए बताया कि उर्स पाक की शुरुआत 13 मई को बाद नमाज मगरिब दरगाह शरीफ में परचम कुशाई से होगी। 
  • 14 मई को ख़ादिम-ए-आस्ताना के दौलतकदे, जामा मस्जिद के करीब से रात आठ बजे शाही संदल निकलकर शहर का गश्त करता हुआ दरगाह शरीफ पहुंचेगा जहां चादरपोशी की रस्म अदा कर रियासत छत्तीसगढ़ समेत मुल्क-ओ-मिल्लत के लिए अम्नो-अमां, तरक्की और खुशहाली की दुआ की जाएगी। 
  • 15 मई को रात 9:30 बजे मशहूर आतिशबाजी अयाज रजा, रजा फायर वर्क्स की ओर से दिलकश आतिशबाजी की जाएगी। जिसके बाद रात 10 बजे से निसार एहसान चिश्ती एंड ब्रदर्स, कव्वाल चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) और नौशाद चिश्ती कव्वाल, मुजफ्फरनगर (दिल्ली) के बीच कव्वाली का मुकाबला होगा। 
  • 16 मई को छोटे मजीद शोला कव्वाल एंड पार्टी, मुंबई और जुनैद सुल्तानी कव्वाल (बदायुं) के बीच कव्वाली का मुकाबला होगा। 
  • 17 मई को शाकिब अली साबरी कव्वाल, लखनऊ और गुलाम हबीब पेंटर कव्वाल, अलीगढ़ के बीच कव्वाली का मुकाबला होगा। 
  • 18 मई को सुबह 8 बजे कुल की फातेहा के साथ सालाना उर्स पाक (एकता उत्सव) इख्तेताम पजीर होगा। 
    
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    ज्यूरी बोर्ड इंचार्ज हाजी इसराइल बेग शाद ने खानदान के किसी फर्द की याद में यादगारी अवार्ड देने के ख्वाहिशमंद लोगों से राब्ता करने कहा है। बैठक के आखिर में राजेंद्र पाल सिंह भाटिया, सीनियर नायब सदर, सालाना उर्स पाक कमेटी ने सभी के तंई शुक्रगुजारी का इजहार किया। 

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    बैठक में अजय शर्मा, अमजद अली, शेख असलम, हैदर अली, नसीम फारूकी, अबरार पुवार, मारूफ आलम, हाजी मिर्जा साजिद, अतिक़ शेख, मोहम्मद सादिक, शाहबाज खान, मुन्ना खान, जाहिद अली, हाजी इस्माइल चौहान, मोहसिन हाशमी, अमजद खान, शेख यूनुस, दिलराज भाटिया, सिमरन जीत सिंह समेत कमेटी दीगर अराकीन मौजूद थे। 

काबुली दरबार : सालाना उर्स देता है भाईचारगी और यकजहती का पैगाम

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सालाना उर्स पार्क (एकता उत्सव) की तकरीब के पोस्टर का अमल में आया रस्मे इजरा

✅ नई तहरीक : दुर्ग 

हजरत बाबा सैयद अब्दुल रहमान शाह काबुली रहमतुल्ला अलैह, पुराना बस स्टैंड का सालाना उर्स पाक (एकता उत्सव ) 13 मई से शुरू होने जा रहा है। उर्सपाक को लेकर गुजिश्ता दिनों मुनाकिद बैठक में उर्सपाक की तकरीब के पोस्टर का रस्मे इजरा अमल में आया। बैठक की सदारत उर्सपाक कमेटी के सदर प्रकाश देशलहरा ने की। 
    बैठक से खिताब करते हुए उन्होंने कहा कि काबुली बाबा का उर्स पाक न केवल रियासत छत्तीसगढ़ बल्कि दीगर प्रांतो में भी खासी अहमियत रखता है,  भाईचारा, प्यार, हम आहंगी और यकजहती का पैगाम देने वाले काबुली दरबार के उर्सपाक में सभी मजाहिब के लोग पूरी अकीदत से शामिल होते हैं। 

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  •     कमेटी के जनरल सेक्रेटरी रऊफ कुरेशी ने तकरीब की तफसीली जानकारी देते हुए बताया कि उर्स पाक की शुरुआत 13 मई को बाद नमाज मगरिब दरगाह शरीफ में परचम कुशाई से होगी। 
  • 14 मई को ख़ादिम-ए-आस्ताना के दौलतकदे, जामा मस्जिद के करीब से रात आठ बजे शाही संदल निकलकर शहर का गश्त करता हुआ दरगाह शरीफ पहुंचेगा जहां चादरपोशी की रस्म अदा कर रियासत छत्तीसगढ़ समेत मुल्क-ओ-मिल्लत के लिए अम्नो-अमां, तरक्की और खुशहाली की दुआ की जाएगी। 
  • 15 मई को रात 9:30 बजे मशहूर आतिशबाजी अयाज रजा, रजा फायर वर्क्स की ओर से दिलकश आतिशबाजी की जाएगी। जिसके बाद रात 10 बजे से निसार एहसान चिश्ती एंड ब्रदर्स, कव्वाल चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) और नौशाद चिश्ती कव्वाल, मुजफ्फरनगर (दिल्ली) के बीच कव्वाली का मुकाबला होगा। 
  • 16 मई को छोटे मजीद शोला कव्वाल एंड पार्टी, मुंबई और जुनैद सुल्तानी कव्वाल (बदायुं) के बीच कव्वाली का मुकाबला होगा। 
  • 17 मई को शाकिब अली साबरी कव्वाल, लखनऊ और गुलाम हबीब पेंटर कव्वाल, अलीगढ़ के बीच कव्वाली का मुकाबला होगा। 
  • 18 मई को सुबह 8 बजे कुल की फातेहा के साथ सालाना उर्स पाक (एकता उत्सव) इख्तेताम पजीर होगा। 
    
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    ज्यूरी बोर्ड इंचार्ज हाजी इसराइल बेग शाद ने खानदान के किसी फर्द की याद में यादगारी अवार्ड देने के ख्वाहिशमंद लोगों से राब्ता करने कहा है। बैठक के आखिर में राजेंद्र पाल सिंह भाटिया, सीनियर नायब सदर, सालाना उर्स पाक कमेटी ने सभी के तंई शुक्रगुजारी का इजहार किया। 

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    बैठक में अजय शर्मा, अमजद अली, शेख असलम, हैदर अली, नसीम फारूकी, अबरार पुवार, मारूफ आलम, हाजी मिर्जा साजिद, अतिक़ शेख, मोहम्मद सादिक, शाहबाज खान, मुन्ना खान, जाहिद अली, हाजी इस्माइल चौहान, मोहसिन हाशमी, अमजद खान, शेख यूनुस, दिलराज भाटिया, सिमरन जीत सिंह समेत कमेटी दीगर अराकीन मौजूद थे। 

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Sunday, 13 April 2025

 शव्वाल उल मुकर्रम, 1446 हिजरी 

   फरमाने रसूल ﷺ   

"जो कोई नजूमी (ज्योतिश) के पास जाए फिर उससे कुछ पूछे तो उसकी चालीस रात की नमाज़े क़ुबूल न होगी।"

- मुस्लिम



सफर-ए-हज पर रवाना होने वाले आजमीन के लिए ट्रेनिंग कैंप मुनाकिद

✅ नई तहरीक : भिलाई

मरकज सुपेला मस्जिद, नूर सुपेला की ओर से इस साल हज पर जाने वाले हुज्जाजे कराम के लिए तरबीयत कैंप, इतवार की दोपहर फरीद नगर में मुनाकिद किया गया जहां मुफ्ती मोहम्मद इमरान और मुफ्ती फैयाज ने हज के दौरान अदा किए जाने वाले अरकान को आसान तरीके से समझाया।
इस दौरान आजमीन-ए-हज को मुफ्तियान कराम ने बताया कि हैसियत वालों पर जिंदगी में एक बार हज फ़र्ज़ है। अपने घरवालों पर खर्च करने के बाद इतनी रकम हो कि हज पर जा सकें तो जब अल्लाह मौका दे, तो हज जरूर अदा करें। उलेमा ने उनसे कहा कि सफर पर रवाना होने से पहले अपना दिल हर एक से साफ कर लें। किसी से पहले कभी कहा-सुनी हुई है, तो माफी तलाफी कर लें। जहां जा रहे हैं, वो अल्लाह का दुनिया में घर है, पाक-साफ और हर किस्म की बदगुमानी से दिल भी साफ रहे। काबा शरीफ का तवाफ करने के बाद आजमीन-ए-हज की कैफियत बिल्कुल ऐसी हो जाती है जैसे वह आज ही तवल्लुद हुआ है। यानी उसके जिम्मे कोई गुनाह बाकी नहीं रहता। उलेमा ने कहा कि हज पर जाने से कब्ल उसके अरकान के बारे में पूरी मालूमात कर लेने से हर अरकान आसानी से अदा होते हैं। 



    उन्होंने कहा कि हज पर जाने वाले बहुत मुबारक लोग हैं। वहां हज़रत इब्राहिम, इस्माइल अलैहिस्सलाम की सुन्नत कुर्बानी अदा करना है। मदीने की हाजिरी पर दरूद व सलाम हर वक्त ज़ुबान पर जारी रखें। हजरत मोहम्मद 000 के रोजे मुबारक पर हाजिरी पर सलाम पेश करें। हर वक्त पूरी इंसानियत की हिदायत की दुआ करें। उलेमा ने उमरा और हज के तरीके मसाइल और सुन्नत और वाजिबात से कुरआन और हदीस की रोशनी में बताए। उन्होंने एहराम बांधने का तरीका समझाया। मुफ्तीयान कराम ने बताया कि हज की किस्म और हज के तीन फर्ज है। जिसमें एहराम, नीयत, तलबिया, दो वुकुफे अरफा तीन तवाफे जियारत हज में छह वाजिब है। इसी तरह मुजदलफा की हाजिरी, तीनों शैतानों को कंकरी मारना, कुर्बानी, हलक कराना, हज की सई करना और तवायफें विदा भी शामिल हैं।
    उलेमा ने कहा कि जब आप हज से वापस आएंगे तो आपकी जिंदगी में अब अल्लाह का डर के साथ हज़रत मुहम्मद 000 वाली पाकीजा जिंदगी अपनाना और उसके मुताबिक जिंदगी गुजारने और लोगों के साथ हमदर्दी, सिला रहमी और मददगार साबित होना चाहिए।
    इस दौरान मस्जिद नूर सुपेला के हाजी नईम अहम, हाजी नैय्यर इकबाल और हाजी अब्दुल हमीद ने बताया कि हर साल हज पर जाने वालों के लिए तरबीयती प्रोग्राम मुनाकिद किया जाता  है ताकि लोगों को हज आसान हो सके। आखिर में दुर्ग भिलाई से हज पर जाने वालों को हाजी हमीद की लिखी हिंदी की किताब रहनुमा-ए-हज मुफ्त तकसीम की गई। आखिर में मुल्क में अमन चैन खुशहाली और तरक्की की दुआएं की गई। इस दौरान सैय्यद असलम, हाफिज नसीम, हाफिज अब्दुल मतीन, फैजी पटेल, सुलेमान, अब्दुल जमील, अब्दुल समद, वसीम अहमद समेत आजमीन हज 60 मौजूद थे।

आजमीन-ए-हज को हिदायत, सफर से कब्ल अपना दिल हर एक से साफ कर लें : उलेमा

 शव्वाल उल मुकर्रम, 1446 हिजरी 

   फरमाने रसूल ﷺ   

"जो कोई नजूमी (ज्योतिश) के पास जाए फिर उससे कुछ पूछे तो उसकी चालीस रात की नमाज़े क़ुबूल न होगी।"

- मुस्लिम



सफर-ए-हज पर रवाना होने वाले आजमीन के लिए ट्रेनिंग कैंप मुनाकिद

✅ नई तहरीक : भिलाई

मरकज सुपेला मस्जिद, नूर सुपेला की ओर से इस साल हज पर जाने वाले हुज्जाजे कराम के लिए तरबीयत कैंप, इतवार की दोपहर फरीद नगर में मुनाकिद किया गया जहां मुफ्ती मोहम्मद इमरान और मुफ्ती फैयाज ने हज के दौरान अदा किए जाने वाले अरकान को आसान तरीके से समझाया।
इस दौरान आजमीन-ए-हज को मुफ्तियान कराम ने बताया कि हैसियत वालों पर जिंदगी में एक बार हज फ़र्ज़ है। अपने घरवालों पर खर्च करने के बाद इतनी रकम हो कि हज पर जा सकें तो जब अल्लाह मौका दे, तो हज जरूर अदा करें। उलेमा ने उनसे कहा कि सफर पर रवाना होने से पहले अपना दिल हर एक से साफ कर लें। किसी से पहले कभी कहा-सुनी हुई है, तो माफी तलाफी कर लें। जहां जा रहे हैं, वो अल्लाह का दुनिया में घर है, पाक-साफ और हर किस्म की बदगुमानी से दिल भी साफ रहे। काबा शरीफ का तवाफ करने के बाद आजमीन-ए-हज की कैफियत बिल्कुल ऐसी हो जाती है जैसे वह आज ही तवल्लुद हुआ है। यानी उसके जिम्मे कोई गुनाह बाकी नहीं रहता। उलेमा ने कहा कि हज पर जाने से कब्ल उसके अरकान के बारे में पूरी मालूमात कर लेने से हर अरकान आसानी से अदा होते हैं। 



    उन्होंने कहा कि हज पर जाने वाले बहुत मुबारक लोग हैं। वहां हज़रत इब्राहिम, इस्माइल अलैहिस्सलाम की सुन्नत कुर्बानी अदा करना है। मदीने की हाजिरी पर दरूद व सलाम हर वक्त ज़ुबान पर जारी रखें। हजरत मोहम्मद 000 के रोजे मुबारक पर हाजिरी पर सलाम पेश करें। हर वक्त पूरी इंसानियत की हिदायत की दुआ करें। उलेमा ने उमरा और हज के तरीके मसाइल और सुन्नत और वाजिबात से कुरआन और हदीस की रोशनी में बताए। उन्होंने एहराम बांधने का तरीका समझाया। मुफ्तीयान कराम ने बताया कि हज की किस्म और हज के तीन फर्ज है। जिसमें एहराम, नीयत, तलबिया, दो वुकुफे अरफा तीन तवाफे जियारत हज में छह वाजिब है। इसी तरह मुजदलफा की हाजिरी, तीनों शैतानों को कंकरी मारना, कुर्बानी, हलक कराना, हज की सई करना और तवायफें विदा भी शामिल हैं।
    उलेमा ने कहा कि जब आप हज से वापस आएंगे तो आपकी जिंदगी में अब अल्लाह का डर के साथ हज़रत मुहम्मद 000 वाली पाकीजा जिंदगी अपनाना और उसके मुताबिक जिंदगी गुजारने और लोगों के साथ हमदर्दी, सिला रहमी और मददगार साबित होना चाहिए।
    इस दौरान मस्जिद नूर सुपेला के हाजी नईम अहम, हाजी नैय्यर इकबाल और हाजी अब्दुल हमीद ने बताया कि हर साल हज पर जाने वालों के लिए तरबीयती प्रोग्राम मुनाकिद किया जाता  है ताकि लोगों को हज आसान हो सके। आखिर में दुर्ग भिलाई से हज पर जाने वालों को हाजी हमीद की लिखी हिंदी की किताब रहनुमा-ए-हज मुफ्त तकसीम की गई। आखिर में मुल्क में अमन चैन खुशहाली और तरक्की की दुआएं की गई। इस दौरान सैय्यद असलम, हाफिज नसीम, हाफिज अब्दुल मतीन, फैजी पटेल, सुलेमान, अब्दुल जमील, अब्दुल समद, वसीम अहमद समेत आजमीन हज 60 मौजूद थे।

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Saturday, 5 April 2025

व्यंग्य

सड़क का राजनीतिक समीकरण (व्यंग्य)

✅ सईद खान 

    ये गांधी चौक है। चौक में चमकदार टाइल्सयुक्त गोल घेरा, घेरे के भीतर सुंदर बागीचा, बागीचे के बीच रंगीन फव्वारा और फव्वारे के बीचो-बीच राष्टÑपिता महात्मा गांधी की कांस्य निर्मित आदमकद प्रतिमा स्थापित है। शायद इसी से चौक का नाम गांधी चौक पड़ा। अथवा मुमकिन है कि चौक का नाम पहले से गांधी चौक रहा हो और किसी मंत्री-संत्री ने बापू की प्रतिमा यहां बाद में स्थापित करवाई हो। यह पुख्ता करने के लिए कि यही गांधी चौक है। अथवा बापू की स्मृति को चिरजीवि बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया हो। अथवा बापू के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए, अथवा अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए या किसी ठेकेदार को उपकृत करने के लिए भी ऐसा किया गया हो सकता है। जो भी हो, आप तो सिर्फ आम खाओ।   

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    एक अदद गांधी चौक आपके शहर में भी होगा। गांधी चौक अमूमन हर शहर में पाया जाता है। शहर अगर बड़ा हुआ तो एक से ज्यादा चौक भी हो सकते हैं। ज्यादातर गांधी, नेहरु, पटेल और आजाद जैसी अजÞीम शख्सियतों के नाम से वाबस्ता-तो कुछ अपनी सिफत की वजह से मशहूर हो जाते हैं। जैसे जलेबी चौक, जहां किसी नेता अथवा महापुरुष की कोई प्रतिमा नहीं है। न गोल घेरा है, न बागीचा और न फव्वारा। चौक के पास जलेबी की एक बहुत पुरानी दुकान है-बस। इसी से चौक का नाम जलेबी चौक पड़ गया और तब से यह इसी नाम से जाना जा रहा है। ऐसे ही दुर्घटना चौक, जो महज इसलिए मशहूर हो गया क्योंकि आए दिन वहां दुर्घटना होती रहती है। इसी तरह किशन चौक, धरना चौक आदि-इत्यादि। 

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    मशहूर हस्तियों के नाम से वाबस्ता चौक-चौराहों पर हर साल 15 अगस्त, 26 जनवरी और जयंती-पुण्यतिथि के मौके पर जुटने वाली कुछ होशमंद लोगों की भीड़ से पता चलता है कि देशभक्ति की भावना वाले कुछ लोग अब भी बचे हुए हैं। इसी बहाने चौक के साथ-साथ प्रतिमाओं की थोड़ी झाड़-पोंछ हो जाया करती है। हालांकि उस भीड़ में कितने देशभक्ति की भावना वाले और कितने अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने की गरज वाले होते हैं, इसका निर्धारण होना अभी बाकी है। आप कृपया, चौक पर लगी प्रतिमा का चश्मा अथवा टोपी क्षतिग्रस्त होने को विपक्षी पार्टी की साजिश बताकर आसमान सिर पर उठाने वालों की भीड़ से कोई अनुमान न लगाएं।  

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    चौक का होना न सिर्फ व्यवस्थित यातायात के लिए जरूरी है बल्कि इसके होने से राजनीति करने वालों को एक ठिया भी मयस्सर हो जाता है। चौक न हो तो छुटभैय्ये नेताओं के समक्ष विकट समस्या पैदा हो जाएगी। धरना-प्रदर्शन, पुतला दहन, रैली का समापन और किसी की आत्मा की शांति के लिए वे कैंडल कहां जलाएंगे। ये सारे आयोजन चौक में ही संपन्न होते हैं और यहीं से छुटभैय्ये राजनीति का ककहरा सीखते हैं। छुटभैय्यों द्वारा तीज-त्यौहारों और अपने प्रिय नेता को उनके जन्मदिन पर बधाई देने वाली होर्डिंग्स लगाने को भी आप इसी संदर्भ से जोड़कर देख सकते हैं। इस बहाने छुटभैय्यों की फोटू महीनों चौक पर लटकी रहकर राजनीति के मैदान में लंबी कूद के लिए उन्हें ऊर्जा प्रदान करती रहती है। इन कामों के लिए छुटभैय्ये अगर चौक की शरण में न जाएं तो शहरवासियों को पता कैसे चलेगा कि उन्होंने फलां को श्रद्धांजलि अर्पित की है या फलां के विरोध में उसका पुतला फंूका है, अथवा अपने प्रिय नेता को बधाई देने के लिए उन्होंने कितनी बड़ी होर्डिंग लगाई है। इस लेहाज से चौक को आप वाया वार्ड अध्यक्ष, संसद के रेड कार्पेट तक पहुंचने का शार्टकट भी कह सकते हंै। यानि चौक है तो राजनीति है। चौक न हो तो छुटभैय्ये नेताओं को वार्ड अध्यक्ष बनने में ही सालों लग जाएं। महापौर की कुर्सी तक पहुंचना तो दूर की बात है।  

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    चौक के होने के लिए सड़क का होना जरूरी है। छुटभैय्यों के समक्ष जो अहमियत चौक की है, वही सड़क की है। सड़क, सामान्य आदमी के लिए भी खासा महत्व रखती है। आदमी चाहे हवाई जहाज में ही सवार होने के लिए घर से निकला हो, उसका पहला कदम सड़क पर ही पड़ता है। हद तो यह कि आदमी के बच्चे को पैदा होने के लिए भी अब सड़क नापनी पड़ रही है। पहले ऐसा नहीं था। पहले दाईयां घर आ जाती थी। इस लेहाज से सड़क और आदमी के रिश्ते को जन्मजात भी कहा जा सकता है। यही वजह है कि सड़क चाहे जितनी भी जर्जर हो, छोटे-बड़े सैकड़ों गड्ढों से भरी हो और दुर्घटना को आमंत्रित करने वाली हो, आदमी उसका मोह नहीं छोड़ पाता। जर्जर सड़क पर आदमी के नि:शब्द आवाजाही करने का कोई और तात्पर्य मेरी समझ में नहीं आता। 

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    आदमी वर्ग में पाए जाने वाले इंजीनियरों की सड़क बनाने में विशेष रूचि और मंत्री के सड़क निर्माण की प्रक्रिया को लेकर चौकस रहने को भी आप सड़क के साथ आदमी वर्ग के जन्मजात रिश्तों के संदर्भ से जोड़कर देख सकते हैं। आदमी के ही एक वर्ग का सड़क से इतना प्रागाढ़ नाता होता है कि उसे सड़कछाप कहकर विभूषित किया जाता है। हालांकि सभ्य समाज के समक्ष आदमी के सड़कछाप होने को बुरा समझा जाता है। लेकिन जिस तरह विरोध प्रदर्शन के दौरान धवल वस्त्रधारी नेता खुद को धूलभरी सड़क पर पालथी मारकर बैठने से नहीं रोक पाता, उसी तरह आदमी भी खुद को सड़कछाप होने से नहीं रोक पाता। दोनों की अपनी-अपनी मजबूरी है। 

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    आदमी और सड़क के परस्पर संबंध का पता सड़कों पर लगी महापुरुषों की नाम पट्टिकाओं से भी चलता है। ये सड़क ही है, जो देश के प्रति महापुरुषों के योगदान को रेखांकित करने के भी काम आती है। आगे चलकर सड़कों पर लगी ये नाम पट्टिकाएं राजनीति करने वालों को उन पर कालिख पोतने का अवसर भी प्रदान करती है। 

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    बहरहाल ! मेरे शहर में एक और गांधी चौक है। शायद आपके शहर में न हो। किसी शहर में एक ही नाम के दो चौक का होना दुर्लभ हो सकता है। लेकिन मेरे शहर में ऐसा है। कहा जाता है कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बापू यहां आए थे और यहां उन्होंने सभा भी ली थी। बाद में बापू के आगमन और उनकी सभा को यादगार बनाने के लिए हुकूमत ने उस स्थल को घेरकर वहां बापू की प्रतिमा स्थापित करवा दी थी। तब से लोग इसे गांधी चौक कहने लगे थे। कालांतर में शहर का विस्तार होने के साथ ही गोल घेरे के आसपास फुटकर व्यवसायी अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुए गोल घेरे के चारों ओर पसर गए। यहां तक कि लोगों ने घेरे की जाली से टाट बांधने से भी गुरेज न किया। नतीजा, अब यह गांधी चौक की बजाए हटरी चौक के नाम से जाना जाता है। अब यहां विशेष अवसरों पर कोई आयोजन नहीं होता। अब यहां बजबजाती नालियां और तंग गलियां हैं जो कहीं जाकर नहीं मिलती बल्कि वहीं-वहीं घूमकर लौट आती है। जबकि उस चौक से निकली एक सड़क मंत्री के निवास तक जाती है तो दूसरी अन्य शहरों को इस शहर से जोड़ती है। छुटभैय्यों को ये वाले बापू की बजाए वो वाले बापू का आशिर्वाद ज्यादा सूट करता है। पता नहीं क्यों। जबकि दोनों ही जगह बापू आशिर्वाद की मुद्रा में खड़े हैं। 

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व्यंग्य

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    ये गांधी चौक है। चौक में चमकदार टाइल्सयुक्त गोल घेरा, घेरे के भीतर सुंदर बागीचा, बागीचे के बीच रंगीन फव्वारा और फव्वारे के बीचो-बीच राष्टÑपिता महात्मा गांधी की कांस्य निर्मित आदमकद प्रतिमा स्थापित है। शायद इसी से चौक का नाम गांधी चौक पड़ा। अथवा मुमकिन है कि चौक का नाम पहले से गांधी चौक रहा हो और किसी मंत्री-संत्री ने बापू की प्रतिमा यहां बाद में स्थापित करवाई हो। यह पुख्ता करने के लिए कि यही गांधी चौक है। अथवा बापू की स्मृति को चिरजीवि बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया हो। अथवा बापू के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए, अथवा अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए या किसी ठेकेदार को उपकृत करने के लिए भी ऐसा किया गया हो सकता है। जो भी हो, आप तो सिर्फ आम खाओ।   

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  शव्वाल, 1446 हिजरी

   फरमाने रसूल ﷺ   

कोई इंसान अच्छे अमल करता है और लोग उसकी तारीफ करते है तो ये गोया मोमिन के लिए दुनिया में ही जन्नत की बशारत है। 
- सहीह मुस्लिम 

दुनिया की दो महंगी इमारतें सऊदी अरब के तारीख़ी शहर मक्का में मौजूद हैं, रिपोर्ट

मस्जिद उल हराम : दुनिया की सबसे महंगी इमारत करार

    लंदन : ख़ाना-ए-काअबा के एतराफ़ की मस्जिद, मस्जिद उल-हराम को दुनिया की महंगी तरीन इमारत क़रार दिया गया है। बर्तानवी मीडिया की जानिब से गुजिश्ता रोज़ दुनिया की 20 महंगी तरीन इमारतों पर मबनी एक फेहरिस्त जारी की गई है। फेहरिस्त में दुनिया की दो महंगी इमारतें सऊदी अरब के तारीख़ी शहर मक्का में मौजूद हैं। इनमें सर-ए-फेहरिस्त मस्जिद उल-हराम और दूसरे नंबर पर क्लाक टावर है। 

मस्जिद उल हराम : दुनिया की सबसे महंगी इमारत करार
  

    रिपोर्ट के मुताबिक़ मुसलमानों के लिए मुक़द्दस तरीन मुक़ाम, मक्का की अज़ीम मस्जिद मस्जिद उल-हराम में एक वक़्त में चालीस लाख अफ़राद समा सकते हैं। मस्जिद उल हराम 400,800 मुरब्बा मीटर (99 एकड़) पर मुहीत है जिसके बैरूनी और अंदरूनी हिस्सों में नमाज़ अदा की जा सकती है।

मस्जिद उल हराम : दुनिया की सबसे महंगी इमारत करार


    इस मुक़द्दस तरीन मुक़ाम पर हज्र-ए-अस्वद भी नसब है जिसे पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मदﷺ ने काअबा की दीवार में अपने हाथों से लगाया था, यहां मुक़ाम-ए-इब्रहीमी भी मौजूद है।

मस्जिद उल हराम : दुनिया की सबसे महंगी इमारत करार


    याद रहे कि इस इमारत में ग़ैर मुस्लिमों को दाख़िले की इजाज़त नहीं है। मक्का में ही ऐन मस्जिद उल हराम के साथ अबराज क्लाक टावर तामीर किया गया है जो दुनिया के बुलंद तरीन क्लाक टावर और दुनिया के बुलंद तरीन होटल होने का रिकार्ड अपने नाम किए हुए है। इस इमारत में नसब घड़ियाल भी दुनिया का सबसे बड़ा घड़ियाल है जिसका क़तर 43 मीटर है, उसे दुनिया की तीसरी बुलंद तरीन इमारत भी क़रार दिया जाता है जिसकी बुलंदी 1,972 फ़ुट है। इसकी लागत 15 बिलीयन डालर है। 

मस्जिद उल हराम : दुनिया की सबसे महंगी इमारत करार


    मंहगीतरीन इमारतों में इसके बाद आता है रेज़ोरट्स वर्ल्ड सेंटोसा, सिंगापुर) का नंबर जिसकी तामीर की कुल लागत 6.59 बिलीयन डालर है। ये रेज़ोर्ट और तफ़रीही काम्प्लेक्स सेंटोसा के जज़ीरे पर, सिंगापुर के जुनूबी साहिल से थोड़ा दूरी पर वाके है जिसमें एक केसीनो, एक यूनीवर्सल स्टूडियो, थीम पार्क, एक वाटर पार्क और एक एक्वेरियम है। इसे दुनिया का सबसे बड़े समुंद्री घर कहा जाता है। 

मस्जिद उल हराम : दुनिया की सबसे महंगी इमारत करार


    रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया की पांचवे नंबर की महंगी तरीन इमारत दी कास्मो पोलीटन लास वेगास का बेहतरीन होटल है जो अपने आने वाले हर सारिफ़ का हर तरह से ख़्याल रखने की सलाहीयत रखता है। फेहरिस्त में छठे नंबर पर दुनिया की महंगी इमारत का दर्जा न्यूयार्क में मौजूद वन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को दिया गया है जिसकी तामीर की कुल लागत 3.8 बिलीयन डालर है।

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    इसी तरह फेहरिस्त के सातवें नंबर पर दुबई के दार-उल-हकूमत अबूधाबी में वाके एमरेटस पैलेस होटल है, जिसकी तामीर की कुल लागत 3 बिलीयन डालर है। हैरत-अंगेज़ तौर पर इस फेहरिस्त में भारत के अमीरतरीन शख्स मुकेश अंबानी का मुंबई में वाके घर एंटीलिया का नंबर दुनिया की महंगी तरीन इमारतों में बारहवें नंबर पर आता है जिसकी तामीर की कुल लागत 2 बिलीयन डालर है। फेहरिस्त में 17 नंबर पर लंदन में वाके वेम्बले स्टेडीयम है जिसकी तामीर की कुल लागत 1.5 बिलीयन डालर है जबकि दुबई में वाके बुर्ज ख़लीफ़ा का इस फेहरिस्त में 19वां नंबर है। रिपोर्ट के मुताबिक़ इस इमारत की तामीर की कुल लागत 1.5 बिलीयन डालर है। 

मस्जिद उल हराम : दुनिया की सबसे महंगी इमारत करार

  शव्वाल, 1446 हिजरी

   फरमाने रसूल ﷺ   

कोई इंसान अच्छे अमल करता है और लोग उसकी तारीफ करते है तो ये गोया मोमिन के लिए दुनिया में ही जन्नत की बशारत है। 
- सहीह मुस्लिम 

दुनिया की दो महंगी इमारतें सऊदी अरब के तारीख़ी शहर मक्का में मौजूद हैं, रिपोर्ट

मस्जिद उल हराम : दुनिया की सबसे महंगी इमारत करार

    लंदन : ख़ाना-ए-काअबा के एतराफ़ की मस्जिद, मस्जिद उल-हराम को दुनिया की महंगी तरीन इमारत क़रार दिया गया है। बर्तानवी मीडिया की जानिब से गुजिश्ता रोज़ दुनिया की 20 महंगी तरीन इमारतों पर मबनी एक फेहरिस्त जारी की गई है। फेहरिस्त में दुनिया की दो महंगी इमारतें सऊदी अरब के तारीख़ी शहर मक्का में मौजूद हैं। इनमें सर-ए-फेहरिस्त मस्जिद उल-हराम और दूसरे नंबर पर क्लाक टावर है। 

मस्जिद उल हराम : दुनिया की सबसे महंगी इमारत करार
  

    रिपोर्ट के मुताबिक़ मुसलमानों के लिए मुक़द्दस तरीन मुक़ाम, मक्का की अज़ीम मस्जिद मस्जिद उल-हराम में एक वक़्त में चालीस लाख अफ़राद समा सकते हैं। मस्जिद उल हराम 400,800 मुरब्बा मीटर (99 एकड़) पर मुहीत है जिसके बैरूनी और अंदरूनी हिस्सों में नमाज़ अदा की जा सकती है।

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    इस मुक़द्दस तरीन मुक़ाम पर हज्र-ए-अस्वद भी नसब है जिसे पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मदﷺ ने काअबा की दीवार में अपने हाथों से लगाया था, यहां मुक़ाम-ए-इब्रहीमी भी मौजूद है।

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    याद रहे कि इस इमारत में ग़ैर मुस्लिमों को दाख़िले की इजाज़त नहीं है। मक्का में ही ऐन मस्जिद उल हराम के साथ अबराज क्लाक टावर तामीर किया गया है जो दुनिया के बुलंद तरीन क्लाक टावर और दुनिया के बुलंद तरीन होटल होने का रिकार्ड अपने नाम किए हुए है। इस इमारत में नसब घड़ियाल भी दुनिया का सबसे बड़ा घड़ियाल है जिसका क़तर 43 मीटर है, उसे दुनिया की तीसरी बुलंद तरीन इमारत भी क़रार दिया जाता है जिसकी बुलंदी 1,972 फ़ुट है। इसकी लागत 15 बिलीयन डालर है। 

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    मंहगीतरीन इमारतों में इसके बाद आता है रेज़ोरट्स वर्ल्ड सेंटोसा, सिंगापुर) का नंबर जिसकी तामीर की कुल लागत 6.59 बिलीयन डालर है। ये रेज़ोर्ट और तफ़रीही काम्प्लेक्स सेंटोसा के जज़ीरे पर, सिंगापुर के जुनूबी साहिल से थोड़ा दूरी पर वाके है जिसमें एक केसीनो, एक यूनीवर्सल स्टूडियो, थीम पार्क, एक वाटर पार्क और एक एक्वेरियम है। इसे दुनिया का सबसे बड़े समुंद्री घर कहा जाता है। 

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    रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया की पांचवे नंबर की महंगी तरीन इमारत दी कास्मो पोलीटन लास वेगास का बेहतरीन होटल है जो अपने आने वाले हर सारिफ़ का हर तरह से ख़्याल रखने की सलाहीयत रखता है। फेहरिस्त में छठे नंबर पर दुनिया की महंगी इमारत का दर्जा न्यूयार्क में मौजूद वन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को दिया गया है जिसकी तामीर की कुल लागत 3.8 बिलीयन डालर है।

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    इसी तरह फेहरिस्त के सातवें नंबर पर दुबई के दार-उल-हकूमत अबूधाबी में वाके एमरेटस पैलेस होटल है, जिसकी तामीर की कुल लागत 3 बिलीयन डालर है। हैरत-अंगेज़ तौर पर इस फेहरिस्त में भारत के अमीरतरीन शख्स मुकेश अंबानी का मुंबई में वाके घर एंटीलिया का नंबर दुनिया की महंगी तरीन इमारतों में बारहवें नंबर पर आता है जिसकी तामीर की कुल लागत 2 बिलीयन डालर है। फेहरिस्त में 17 नंबर पर लंदन में वाके वेम्बले स्टेडीयम है जिसकी तामीर की कुल लागत 1.5 बिलीयन डालर है जबकि दुबई में वाके बुर्ज ख़लीफ़ा का इस फेहरिस्त में 19वां नंबर है। रिपोर्ट के मुताबिक़ इस इमारत की तामीर की कुल लागत 1.5 बिलीयन डालर है। 

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